आदत और आत्मनियंत्रण। आपकी आदत आपको बना सकती है या बिगाड़ सकती है। आप पहले अपनी आदतों को नियंत्रित कर अपने को नियंत्रित कर सकते हैं। अपने आप को नियंत्रित करने के बाद ही आप सफल हो सकते हैं।
Thursday, January 10, 2019
Monday, November 19, 2018
hastmaithun ki aadat ko rokne ke tarike/upay
1. apne dimag ko kabu kare- सबसे पहले प्रयास करें कि आप गन्दे विचार न सोचें । यदि बुरे विचार आये तो किसी खुले स्थान पर चले जाये टहले या किसी सही काम में लग जाये और विचारों को शुद्ध करें।
अपने आप को इस तरह बनाये कि आप बुरे विचारों को अपने दिमाग से हटा सके या जहाँ पर हैं, उस स्थान से हट जाये।
2. अपनी सोच को इस तरह बनाइये कि आप सोचें कि यह हस्तमैथुन मजा नहीं एक भयंकर सजा है। हस्तमैथुन से होने वाले नुकसान के बारे में रोज पढ़े या एक विडियो देखें।
3. कभी भी खाली समय अकेले । अकेले रहने पर ये विचार ज्यादा आते हैं, इसलिये जरूर जरूर जरूर.. बिना किसी काम के अकेले में न रहें।
4. कभी भी पोर्न, रोमांटिक, किसिंग विडियो नहीं...नहींं.. नहीं...देखे । इस तरह के लेख न पढ़े। यदि कहीं दिख जाए तो दिमाग पर हावी न होने दे।
डाक्टर से सलाह और इलाज लें।
5. ध्यान केंद्रित व नियंत्रण करने वाले योगा करें। खाली समय अपने हाथों को सामने की तरफ सीने पर नहीं, पीछे की तरफ बांधकर रखिये जैसे विश्राम की मुद्रा में खड़े होते हैं।
6. रात में सोते समय अपने दोनों हाथों की कलाई को किसी एक रस्सी या कपड़े से बांध दीजिये(गांठ मत दीजिये)। सीधा पीठ बल सोचा। रस्सी गर्दन के नीचे से गुजरे और दोनों हाथ सिर के अगल-बगल हो।
रस्सी को खाट से बांध कर अपने हाथों में लपेट सकते हैं।
7. जहाँ गलत विचार आए वहाँ से दूर रहें। अपने वासना के विचारों को हटा दें। मन में वैराग्य लाइए कि स्त्री, वासना ये सब सुख नहीं दुख है।
वासना के लिए शारीरिक शक्ति छोड़ देना सही नहीं है, लेकिन शारीरिक शक्ति को बचाने के लिए वासना छोड़ देना सही है।
8. अकेले में गलत विचार आये तो अकेले कमरे या ऐसी किसी जगह में न रहें।
मजा के लिए हस्तमैथुन न करें। इसको रोकने में बुद्धिमानी दिखाए, जोश में होश खोकर शरीर न बिगाड़े।
9. अपने आप को सही कार्य में लगाइए। आडियो गाने सुनिए, अच्छे विचार सुनिए।
कुछ दिन आदत छूट जाने पर ये मत सोचिए कि एक बार कर लेता हूँ कुछ नहीं होगा। एक बार करने पर आप ये बार बार करेंगे और बहुत कुछ खराब हो जायेगा।
संकल्प कीजिये रोकिये इसे।
अपने आप को इस तरह बनाये कि आप बुरे विचारों को अपने दिमाग से हटा सके या जहाँ पर हैं, उस स्थान से हट जाये।
2. अपनी सोच को इस तरह बनाइये कि आप सोचें कि यह हस्तमैथुन मजा नहीं एक भयंकर सजा है। हस्तमैथुन से होने वाले नुकसान के बारे में रोज पढ़े या एक विडियो देखें।
3. कभी भी खाली समय अकेले । अकेले रहने पर ये विचार ज्यादा आते हैं, इसलिये जरूर जरूर जरूर.. बिना किसी काम के अकेले में न रहें।
4. कभी भी पोर्न, रोमांटिक, किसिंग विडियो नहीं...नहींं.. नहीं...देखे । इस तरह के लेख न पढ़े। यदि कहीं दिख जाए तो दिमाग पर हावी न होने दे।
डाक्टर से सलाह और इलाज लें।
5. ध्यान केंद्रित व नियंत्रण करने वाले योगा करें। खाली समय अपने हाथों को सामने की तरफ सीने पर नहीं, पीछे की तरफ बांधकर रखिये जैसे विश्राम की मुद्रा में खड़े होते हैं।
6. रात में सोते समय अपने दोनों हाथों की कलाई को किसी एक रस्सी या कपड़े से बांध दीजिये(गांठ मत दीजिये)। सीधा पीठ बल सोचा। रस्सी गर्दन के नीचे से गुजरे और दोनों हाथ सिर के अगल-बगल हो।
रस्सी को खाट से बांध कर अपने हाथों में लपेट सकते हैं।
7. जहाँ गलत विचार आए वहाँ से दूर रहें। अपने वासना के विचारों को हटा दें। मन में वैराग्य लाइए कि स्त्री, वासना ये सब सुख नहीं दुख है।
वासना के लिए शारीरिक शक्ति छोड़ देना सही नहीं है, लेकिन शारीरिक शक्ति को बचाने के लिए वासना छोड़ देना सही है।
8. अकेले में गलत विचार आये तो अकेले कमरे या ऐसी किसी जगह में न रहें।
मजा के लिए हस्तमैथुन न करें। इसको रोकने में बुद्धिमानी दिखाए, जोश में होश खोकर शरीर न बिगाड़े।
9. अपने आप को सही कार्य में लगाइए। आडियो गाने सुनिए, अच्छे विचार सुनिए।
कुछ दिन आदत छूट जाने पर ये मत सोचिए कि एक बार कर लेता हूँ कुछ नहीं होगा। एक बार करने पर आप ये बार बार करेंगे और बहुत कुछ खराब हो जायेगा।
संकल्प कीजिये रोकिये इसे।
Thursday, November 15, 2018
दुनिया में सबसे श्रेष्ठ जीव व सबसे निकृष्ट जीव क्या है?
मेरे विचार से, दुनिया में सबसे श्रेष्ठ जीव पेड़ पौधे हैं। वृक्ष संसार के श्रेष्ठतम जीव हैं। वृक्ष आक्सीजन देते हैं, भोजन देते हैं, विभिन्न प्रकार की उपयोगी वस्तुएँ देते हैं तथा बहुत कम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं या पहुंचा सकते हैं।
सबसे निकृष्ट जीवधारी मानव हैं। मानव यानि मनुष्य से ज्यादा निकृष्ट जीवधारी कोई नहीं है। मनुष्य पर्यावरण का सबसे ज्यादा प्रदूषणकारी , विनाशकारी व खतरनाक जीव है। मनुष्य अपनी सुविधा, सुख व मानसिकता के कारण प्रदूषण फैलाता है, प्राकृतिक घटकों का विनाश करता है तथा अन्य जीवों के जीवन के लिए खतरा उत्पन्न कर देता है।
प्रदूषण फैलाने के कारण मनुष्य सबसे निकृष्ट है, चाहे वह जितना बुद्धिमान हो, चाहे जितना धर्म अपना ले, चाहे जितने साधन जुटा ले।
मनुष्य को इस घमण्ड में नहीं रहना चाहिए कि वह सबसे बुद्धिमान है तो सबसे श्रेष्ठ है।
सबसे निकृष्ट जीवधारी मानव हैं। मानव यानि मनुष्य से ज्यादा निकृष्ट जीवधारी कोई नहीं है। मनुष्य पर्यावरण का सबसे ज्यादा प्रदूषणकारी , विनाशकारी व खतरनाक जीव है। मनुष्य अपनी सुविधा, सुख व मानसिकता के कारण प्रदूषण फैलाता है, प्राकृतिक घटकों का विनाश करता है तथा अन्य जीवों के जीवन के लिए खतरा उत्पन्न कर देता है।
प्रदूषण फैलाने के कारण मनुष्य सबसे निकृष्ट है, चाहे वह जितना बुद्धिमान हो, चाहे जितना धर्म अपना ले, चाहे जितने साधन जुटा ले।
मनुष्य को इस घमण्ड में नहीं रहना चाहिए कि वह सबसे बुद्धिमान है तो सबसे श्रेष्ठ है।
Tuesday, November 6, 2018
जीवन की कुछ जरुरी बातें
1- जीवन में कोई व्यक्ति किसी दूसरे के बारे में यह कहे कि वह तुम्हारी बुराई😈 कर रहा था, तो इसका यकीन न करो। क्योंकि हो सकता है कि वह व्यक्ति आप दोनों को लड़वाना चाहता हो।
2- पहला व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की आपके सामने बुराई😈 करता है तो दूसरे व्यक्ति को इसके बारे में न जरुरी हो तो न बतायें।
3- अपने लक्ष्य से ध्यान न हटाये। युद्ध में शत्रु से, कार्य करते समय उपकरण से, शिक्षा लेते समय विषय वस्तु से ध्यान न हटाये।
4- विलासित इच्छाएं न पाले। इच्छाओं के पूरा न होने पर दुखी न हो।
5- पर्यावरण संरक्षक बने। 🌎 पृथ्वी व पर्यावरण का संरक्षण सबसे ज्यादा जरूरी है।
3- अपने लक्ष्य से ध्यान न हटाये। युद्ध में शत्रु से, कार्य करते समय उपकरण से, शिक्षा लेते समय विषय वस्तु से ध्यान न हटाये।
4- विलासित इच्छाएं न पाले। इच्छाओं के पूरा न होने पर दुखी न हो।
5- पर्यावरण संरक्षक बने। 🌎 पृथ्वी व पर्यावरण का संरक्षण सबसे ज्यादा जरूरी है।
Subscribe to:
Posts (Atom)